Sukoon Shayari

Sukoon Shayari

by YASH GOYAL

यूं तो इन अंधेरों की आदत भी हैं,

और कहूं तो उजलो की जरूरत भी ।

अजीब है ये अंधेरे उजालों के सिलसिले,

या कहूं तो रूह- ए- सुकून की जरूरत भी।

By- Aarchie Tiwari

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